सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी निर्धारित योग्यताओं के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को ही मिलनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को कम योग्यता वाले लोगों के लिए तय नौकरी प्राप्त करने की अनुमति देना योग्य और पात्र उम्मीदवार को वंचित करना है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट का एक आदेश रद्द करते हुए की। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने अस्थायी बैंक परिचारक की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कर्मचारी ने स्नातक होने की बात छिपाकर उस पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी जो 10वीं कक्षा तक की योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित था। सरकारी नौकरी पात्र उम्मीदवारों को निर्धारित योग्यताओं के अनुसार ही दी जानी चाहिए। जब यह पद विशेष रूप से कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए था, तो उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को ऐसी नौकरी देना एक पात्र उम्मीदवार को अवसर से वंचित करने जैसा होगा।
सात मेडिकल कॉलेज नहीं दे रहे छात्रवृत्ति
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर में सिर्फ 7 मेडिकल कॉलेज प्रशिक्षु डॉक्टरों को छात्रवृति के भुगतान नहीं कर रहे। आयोग ने शीर्ष अदालतों को बताया कि इन मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जा रही है। जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ के समक्ष आयोग की ओर से अधिवक्ता गौरव शर्मा ने डॉ. अभिषेक यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी।
केस निपटारे संबंधी याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में मामलों के समय-सीमा में निपटाने को दिशा-निर्देश बनाने और उन्हें लागू करने का आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका में देश की सभी अदालतों में सुनवाई टालने को नियंत्रित करने को एक समान दिशा-निर्देश तय करने की भी मांग की थी। जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया।
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